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- 10h ago
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बड़ा कदम उठाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में आठ न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब इन नामों को आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
कॉलेजियम की ओर से जिन आठ न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाई कोर्ट में जज नियुक्त किए जाने की मंजूरी दी गई है, उनमें गुरविंदर पाल सिंह, निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा-I, भारत पराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं।
इन नियुक्तियों के प्रभावी होने के लिए अभी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। केंद्र सरकार की मंजूरी और इसके बाद आवश्यक नियुक्ति अधिसूचना जारी होने के बाद ही ये नियुक्तियां औपचारिक रूप से प्रभावी होंगी।
दिल्ली हाई कोर्ट देश की सबसे महत्वपूर्ण उच्च न्यायिक संस्थाओं में से एक है। राजधानी से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक, आपराधिक, नागरिक, वाणिज्यिक और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई यहां होती है। ऐसे में हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या न्यायिक कामकाज को सुचारु बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
आठ नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश से हाई कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे विभिन्न पीठों के समक्ष मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायिक संसाधन उपलब्ध होंगे और लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को भी गति मिल सकती है।
हालांकि, नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसका वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के लिए जिन नामों को मंजूरी दी है, वे हैं—
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब इन नामों पर केंद्र सरकार के स्तर पर आगे की प्रक्रिया होगी।
इन नियुक्तियों की सिफारिश भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की है। कॉलेजियम में CJI सूर्यकांत के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हैं।
इस कॉलेजियम में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा शामिल हैं।
कॉलेजियम हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार करता है। न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में संबंधित नामों और उनकी उपयुक्तता पर विचार के बाद सिफारिश की जाती है।
दिल्ली हाई कोर्ट के लिए आठ नामों को मंजूरी देने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अन्य हाई कोर्ट के लिए भी न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों पर फैसला किया है।
कॉलेजियम ने न्यायिक अधिकारी यश पाल बोर्नी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की है।
यह सिफारिश भी अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार के पास जाएगी। सरकार की मंजूरी और आवश्यक अधिसूचना के बाद नियुक्ति प्रभावी होगी।
कॉलेजियम ने झारखंड हाई कोर्ट के लिए भी तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनमें मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नाम शामिल हैं।
इन तीनों नामों को भी हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किए जाने की सिफारिश की गई है। इससे झारखंड हाई कोर्ट की न्यायिक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसी क्रम में कॉलेजियम ने कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए भी तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इनमें उषारानी, के.एस. भरत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी के नाम शामिल हैं।
इस प्रकार कॉलेजियम की बैठक में एक साथ कई हाई कोर्ट के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।
कॉलेजियम की मंजूरी के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। कॉलेजियम की सिफारिशें अब केंद्र सरकार के पास विचार के लिए भेजी जाएंगी।
केंद्र सरकार संबंधित प्रस्तावों पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेगी। सरकार की मंजूरी के बाद नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद ही संबंधित न्यायिक अधिकारी औपचारिक रूप से हाई कोर्ट के न्यायाधीश के पद पर कार्यभार संभाल सकेंगे।
इसलिए फिलहाल इन नामों को कॉलेजियम की ओर से मंजूरी मिली है, जबकि नियुक्ति का अंतिम प्रशासनिक चरण अभी बाकी है।
उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में मामले लंबित रहते हैं। ऐसे में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
जब हाई कोर्ट में पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश उपलब्ध होते हैं तो मामलों की सुनवाई के लिए अधिक पीठ गठित की जा सकती हैं। इससे अलग-अलग श्रेणी के मामलों को अधिक प्रभावी तरीके से सुना जा सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट में भी बड़ी संख्या में मामले आते हैं। राजधानी होने के कारण यहां केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, विभिन्न संस्थानों, कंपनियों, नागरिकों और अन्य पक्षों से जुड़े महत्वपूर्ण मामले सुनवाई के लिए पहुंचते हैं।
आठ नए जजों की नियुक्ति की सिफारिश इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
न्यायिक व्यवस्था के सामने लंबित मामलों का निपटारा एक महत्वपूर्ण चुनौती रहा है। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से इस चुनौती से निपटने में संस्थागत क्षमता बढ़ सकती है।
हालांकि लंबित मामलों का निपटारा केवल न्यायाधीशों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। मामले की प्रकृति, सुनवाई की अवधि, वकीलों की उपलब्धता, दस्तावेजों और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं की गति भी इसमें भूमिका निभाती है।
फिर भी पर्याप्त न्यायिक पदों पर नियुक्तियां न्यायिक संस्थान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती हैं।
कॉलेजियम द्वारा जिन आठ नामों को दिल्ली हाई कोर्ट के लिए मंजूरी दी गई है, वे न्यायिक अधिकारी हैं। हाई कोर्ट में नियुक्ति के बाद उनकी जिम्मेदारी और न्यायिक भूमिका का दायरा और बढ़ जाएगा।
हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उन्हें विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई करनी होगी। इनमें नागरिक विवाद, आपराधिक मामले, सेवा संबंधी विवाद, संवैधानिक प्रश्न, प्रशासनिक फैसलों को चुनौती और अन्य कानूनी मामले शामिल हो सकते हैं।
इस तरह यह नियुक्तियां न केवल संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पदोन्नति हैं, बल्कि दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था के लिए भी अहम मानी जा रही हैं।
कॉलेजियम की इस बैठक में केवल दिल्ली हाई कोर्ट ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए भी न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश की गई है।
इससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न हाई कोर्ट में न्यायिक पदों को भरने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। हाई कोर्ट में रिक्तियों को भरना न्यायिक प्रशासन की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके लिए कॉलेजियम तथा सरकार के बीच निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत काम होता है।
दिल्ली हाई कोर्ट के लिए प्रस्तावित आठ न्यायिक अधिकारियों के सामने नियुक्ति के बाद महत्वपूर्ण न्यायिक जिम्मेदारियां होंगी। हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनके फैसलों का असर बड़ी संख्या में मामलों और पक्षकारों पर पड़ सकता है।
उच्च न्यायालयों की भूमिका केवल मामलों की सुनवाई तक सीमित नहीं है। वे कानून की व्याख्या करते हैं, अधीनस्थ न्यायालयों की निगरानी करते हैं और संवैधानिक तथा कानूनी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय देते हैं।
राजधानी के हाई कोर्ट होने के कारण दिल्ली हाई कोर्ट की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहती है।
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब इन सभी नामों पर आगे की प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्तर पर होगी। सरकार की मंजूरी के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी।
इसके बाद संबंधित न्यायिक अधिकारी औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे। इसलिए फिलहाल यह नियुक्ति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण लेकिन प्रारंभिक संवैधानिक चरण है।
कुल मिलाकर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के लिए आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों को मंजूरी देना न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गुरविंदर पाल सिंह, निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा-I, भारत पराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज के नाम अब केंद्र सरकार के विचाराधीन जाएंगे।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के लिए यश पाल बोर्नी, झारखंड हाई कोर्ट के लिए मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा तथा कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए उषारानी, के.एस. भरत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी के नामों को भी मंजूरी दी गई है।
अब अगला चरण केंद्र सरकार की मंजूरी और नियुक्ति संबंधी अधिसूचना का होगा। इसके बाद ही इन सिफारिशों को औपचारिक नियुक्तियों में बदला जा सकेगा। दिल्ली हाई कोर्ट में प्रस्तावित आठ नियुक्तियों से न्यायिक क्षमता बढ़ने और मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायिक संसाधन उपलब्ध होने की उम्मीद है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


