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- 12h ago
नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को आवश्यक दवाएं घर तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई दवाओं की होम डिलीवरी व्यवस्था अब समीक्षा के दायरे में आ गई है। दवा कारोबारियों के संगठनों की ओर से इस व्यवस्था को बंद करने की मांग उठाए जाने के बाद ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने मामले की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद इस बात की संभावना बढ़ गई है कि दवाओं की होम डिलीवरी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है या इसे समाप्त करने पर विचार हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक इस मामले पर विचार करने के लिए पहले से गठित उपसमिति को मौजूदा परिस्थितियों और कोविड के बाद बदले हालात को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की फिर से समीक्षा करनी होगी। उपसमिति दवाओं की ऑनलाइन और घर तक आपूर्ति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगी। इसमें मरीजों की सुविधा, दवा की बिक्री और वितरण की निगरानी, दवा कारोबारियों के हित तथा दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान जब लोगों के घर से बाहर निकलने पर कई तरह की पाबंदियां थीं और संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा था, उस समय मरीजों तक जरूरी दवाएं पहुंचाने के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया था।
विशेष रूप से बुजुर्गों, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और ऐसे लोगों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हुई, जिन्हें दवा लेने के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था। ऑनलाइन माध्यमों और फोन के जरिए दवाओं के ऑर्डर लेकर उन्हें घर तक पहुंचाने की सुविधा ने दवा खरीदने के तरीके में भी बदलाव किया।
हालांकि कोविड का दौर समाप्त होने के बाद दवा कारोबार से जुड़े संगठनों की ओर से इस व्यवस्था को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए गए। कारोबारियों के संगठनों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में दवाओं की बिक्री और वितरण के लिए निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए।
दवा कारोबारियों के संगठनों की ओर से होम डिलीवरी की व्यवस्था पर रोक लगाने या इसकी समीक्षा करने की मांग उठाई गई है। उनका तर्क है कि दवाओं की बिक्री सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की तरह नहीं होती। दवाओं के मामले में मरीज की सुरक्षा, दवा की सही आपूर्ति, वैध बिक्री और वितरण व्यवस्था तथा नियामकीय निगरानी जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाता है।
इसी मांग के बाद मामले को फिर से डीटीएबी के स्तर पर विचार के लिए रखा गया। बोर्ड ने संबंधित उपसमिति को वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार, होम डिलीवरी व्यवस्था को लेकर बनी उपसमिति अब इस विषय पर नए सिरे से विचार करेगी। उपसमिति यह देख सकती है कि कोविड के दौरान शुरू की गई व्यवस्था को मौजूदा समय में उसी रूप में जारी रखने की आवश्यकता है या इसमें बदलाव किया जाना चाहिए।
समीक्षा के दौरान मरीजों को मिलने वाली सुविधा और दवा कारोबार से जुड़े नियामकीय पहलुओं के बीच संतुलन पर भी विचार किया जा सकता है। यदि जरूरत महसूस की गई तो दवा कारोबारियों के संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
इससे व्यवस्था के सभी पहलुओं को सामने रखने और अलग-अलग पक्षों की राय जानने में मदद मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक उपसमिति में शामिल कई सदस्य फिलहाल दवाओं की होम डिलीवरी व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि घर तक दवा पहुंचने की सुविधा से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिल रहा है।
विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों और गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी मानी जा रही है। जिन इलाकों में दवा की दुकानें सीमित संख्या में हैं या किसी विशेष दवा के लिए लोगों को दूर जाना पड़ता है, वहां होम डिलीवरी से समय और यात्रा दोनों की बचत हो सकती है।
बुजुर्गों और ऐसे मरीजों के लिए भी यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें नियमित रूप से दवाएं लेनी पड़ती हैं और बार-बार बाजार जाना उनके लिए कठिन होता है।
होम डिलीवरी की व्यवस्था की समीक्षा में मरीजों की सुविधा एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। खासकर लंबे समय तक चलने वाले उपचार के लिए नियमित दवाएं लेने वाले मरीजों के लिए घर बैठे दवा प्राप्त करना सुविधाजनक माना जाता है।
दूसरी ओर, नियामकीय स्तर पर यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि दवाओं की बिक्री और वितरण निर्धारित नियमों के अनुसार हो। यही कारण है कि व्यवस्था की समीक्षा के दौरान सुविधा के साथ-साथ निगरानी और अनुपालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
दवा कारोबार में नियामकीय निगरानी का विशेष महत्व है। दवाओं की बिक्री, आपूर्ति और वितरण के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। ऐसे में होम डिलीवरी के माध्यम से दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर यह सुनिश्चित करना जरूरी माना जाता है कि दवा की बिक्री अधिकृत माध्यम से हो और आवश्यक नियामकीय शर्तों का पालन किया जाए।
उपसमिति की समीक्षा में ऐसे ही विभिन्न बिंदुओं पर विचार होने की संभावना है। इसके बाद संबंधित व्यवस्था को लेकर आगे की दिशा तय की जा सकती है।
इसी बीच ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने रक्तदान से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर भी निर्णय लिया है। बोर्ड ने रक्तदाताओं की पहचान को डिजिटल करने की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला लिया है।
रक्तदान के दौरान रक्तदाताओं की पहचान को आधार और आभा से जोड़ने की सिफारिश की गई है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल पहचान की व्यवस्था से रक्तदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने और रक्तदान के बाद उनसे संबंधित जानकारी की निगरानी में मदद मिल सकती है।
डिजिटल पहचान की व्यवस्था लागू होने पर रक्तदान से संबंधित रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित तरीके से रखने में मदद मिल सकती है। इससे यह पता लगाने में भी सहायता मिल सकती है कि कोई व्यक्ति पहले रक्तदान कर चुका है या नहीं और उसके रक्तदान से संबंधित आवश्यक जानकारी क्या है।
प्रस्ताव का एक उद्देश्य ऐसे रक्तदाताओं की पहचान करना भी बताया गया है, जिन्हें किसी कारणवश रक्तदान करने से रोक दिया गया हो। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए ऐसी जानकारी को दोबारा रक्तदान के समय उपलब्ध कराया जा सकता है।
कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को रक्तदान से अस्थायी या स्थायी रूप से रोकने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी स्थिति में उसकी पहचान और संबंधित जानकारी का रिकॉर्ड उपलब्ध होना महत्वपूर्ण हो जाता है।
बोर्ड की सिफारिश के अनुसार डिजिटल पहचान व्यवस्था से रक्त केंद्रों को ऐसे मामलों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे रक्तदान की प्रक्रिया में सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन को मजबूत करने का प्रयास किया जा सकता है।
रक्तदान और रक्त के उपयोग से जुड़े मामलों में सही रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। रक्तदाता की पहचान, रक्तदान का रिकॉर्ड और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध रहने से रक्त केंद्रों के लिए प्रक्रिया को व्यवस्थित करना आसान हो सकता है।
डिजिटल व्यवस्था के जरिए अलग-अलग रक्तदान केंद्रों में उपलब्ध जानकारी को अधिक प्रभावी तरीके से प्रबंधित करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखना आवश्यक होगा।
डीटीएबी की ओर से रक्तदाताओं की पहचान को आधार और आभा से जोड़ने की सिफारिश ऐसे समय में की गई है, जब स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल रिकॉर्ड और पहचान व्यवस्था का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य रक्तदाताओं की पहचान को अधिक व्यवस्थित करना और रक्तदान से जुड़े रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना बताया गया है। साथ ही ऐसे व्यक्तियों की पहचान में मदद मिल सकती है, जिन्हें पहले किसी कारण से रक्तदान के लिए अयोग्य या प्रतिबंधित किया गया हो।
रक्तदान के क्षेत्र में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से रक्त केंद्रों के स्तर पर रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सकता है। इससे रक्तदान से जुड़े आंकड़ों को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी की जांच करने में सुविधा मिल सकती है।
हालांकि डिजिटल पहचान व्यवस्था को लागू करते समय व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, डेटा तक पहुंच और उसके इस्तेमाल के नियमों को स्पष्ट रखना भी महत्वपूर्ण होगा। रक्तदाताओं की जानकारी संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा से जुड़ी हो सकती है, इसलिए इसके इस्तेमाल और संरक्षण के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक होगी।
डीटीएबी के हालिया रुख से स्पष्ट है कि दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था और रक्तदान प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर नियामकीय स्तर पर विचार किया जा रहा है। एक तरफ कोविड के दौरान शुरू हुई दवाओं की होम डिलीवरी व्यवस्था को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप देखने की प्रक्रिया शुरू हुई है, वहीं दूसरी ओर रक्तदाताओं की डिजिटल पहचान को मजबूत करने की दिशा में सिफारिश की गई है।
होम डिलीवरी के मामले में अब उपसमिति की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाता है, उसमें बदलाव किया जाता है या कुछ शर्तों के साथ इसे जारी रखा जाता है।
इसी तरह रक्तदाताओं की डिजिटल पहचान को लेकर भी आगे की प्रक्रिया और लागू किए जाने वाले नियम महत्वपूर्ण होंगे। यदि व्यवस्था लागू होती है तो रक्तदान केंद्रों में पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दोनों मामलों में आगे की प्रक्रिया संबंधित समीक्षा और निर्णयों पर निर्भर करेगी। दवा होम डिलीवरी के संबंध में मरीजों की सुविधा और दवा कारोबार से जुड़े नियामकीय हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बनी रहेगी, जबकि रक्तदान के मामले में डिजिटल पहचान के साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर स्पष्ट व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


