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- 12h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की विवादित टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के खिलाफ अपना राजनीतिक और सोशल मीडिया अभियान तेज कर दिया है। भाजपा ने इस विवाद के बीच ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ शीर्षक से एक वीडियो सॉन्ग जारी किया है। इस गीत के जरिए पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, लोकप्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर अपना संदेश देने की कोशिश की है।
वीडियो सामने आने के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया। ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर इस गीत को पोस्ट करते हुए पार्टी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री के समर्थन में राजनीतिक संदेश दिए। इस घटनाक्रम ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।
‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ वीडियो सॉन्ग को भाजपा के कई प्रमुख नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। इनमें भाजपा सांसद संबित पात्रा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी सहित अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं।
भाजपा नेताओं की ओर से एक साथ वीडियो साझा किए जाने को पार्टी के सोशल मीडिया अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से पार्टी अपने समर्थकों तक प्रधानमंत्री के नेतृत्व और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एक स्पष्ट संदेश पहुंचाना चाहती है।
वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अलग-अलग तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। गीत के बोलों में विपक्ष की आलोचना करते हुए यह दोहराया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पद और राजनीतिक भूमिका से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी वीडियो का व्यापक रूप से साझा किया जाना अपने आप में उसकी लोकप्रियता या जनसमर्थन का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद, इस घटनाक्रम ने राजनीतिक विमर्श में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को एक बार फिर सामने ला दिया है।
भाजपा के इस वीडियो सॉन्ग का मुख्य संदेश उसके शीर्षक में ही दिखाई देता है। गीत में बार-बार कहा गया है, ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा।’ इसके जरिए पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विपक्ष की आलोचना का जवाब देने की कोशिश की है।
गीत में कहा गया है, ‘आंखें झुका लो, कान खोल के सुन लो, मोदी कहीं नहीं जाएगा।’ इसके बाद विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा गया है कि प्रधानमंत्री को झुकाने की कोशिशों के बावजूद उनका नेतृत्व कायम रहेगा।
गीत के अन्य बोलों में भी प्रधानमंत्री के समर्थन और विपक्ष की आलोचना का स्वर दिखाई देता है। इसमें कहा गया है कि जनता का साथ मिलने पर नेतृत्व नहीं रुकता और राजनीतिक विरोध के बावजूद काम जारी रहता है।
वीडियो में कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है कि वह प्रधानमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां करती है, जबकि प्रधानमंत्री विकास और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर काम करने का संदेश देते हैं। गीत के जरिए भाजपा ने राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की है।
इस प्रकार यह वीडियो केवल एक गीत नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा की संचार रणनीति का हिस्सा बनकर सामने आया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। यह कार्यक्रम बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर चर्चा के बीच एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री कहीं नहीं जाएंगे। इस पर खरगे ने जवाब देते हुए कहा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’
खरगे की इस टिप्पणी के सामने आने के बाद भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा। इसके बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई और मामला सोशल मीडिया तक पहुंच गया।
भाजपा ने इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री के खिलाफ कांग्रेस की भाषा और राजनीतिक शैली से जोड़कर पेश किया। वहीं, इस विवाद ने राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों और उनके प्रभाव को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर खरगे की टिप्पणी के बाद भाजपा ने इसे केवल एक बयान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सोशल मीडिया अभियान के जरिए व्यापक राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ गीत को इसी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। वीडियो के माध्यम से पार्टी ने अपने समर्थकों को एक साझा संदेश दिया है, जिसे आसानी से सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा सकता है।
आज के राजनीतिक दौर में वीडियो सॉन्ग, छोटे वीडियो, ग्राफिक्स और डिजिटल पोस्ट पार्टियों के प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे कंटेंट के जरिए राजनीतिक दल कम समय में अपने समर्थकों तक संदेश पहुंचाने और विरोधी दलों के बयानों पर प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते हैं।
भाजपा ने भी इस विवाद में गीत के जरिए जवाब देने का रास्ता चुना है। पार्टी के नेताओं द्वारा वीडियो साझा किए जाने से इसका प्रचार और अधिक व्यापक हुआ है।
इस विवाद के बाद भाजपा और कांग्रेस के समर्थक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ पोस्ट साझा कर रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से वीडियो, ग्राफिक्स, मीम और एआई से तैयार सामग्री का इस्तेमाल भी राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जा रहा है।
एक ओर भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और उसके समर्थक सरकार की नीतियों तथा भाजपा के राजनीतिक दावों पर सवाल उठाते रहे हैं।
डिजिटल माध्यमों ने राजनीतिक दलों के लिए अपने संदेश को सीधे जनता तक पहुंचाना आसान बना दिया है। अब किसी बड़े नेता का बयान कुछ ही समय में देशव्यापी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि, इसी के साथ बयान के संदर्भ, वीडियो की प्रामाणिकता और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों की तथ्य-जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
एआई से तैयार सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह जरूरी है कि दर्शक किसी वीडियो या ग्राफिक को वास्तविक घटना का प्रमाण मानने से पहले उसकी पुष्टि करें।
खरगे की टिप्पणी और भाजपा के जवाबी गीत ने राजनीतिक भाषा की मर्यादा को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां और अपमानजनक भाषा अक्सर नीतिगत मुद्दों से ध्यान हटाकर राजनीतिक विवाद को केंद्र में ले आती हैं।
भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, इस प्रकरण पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और टिप्पणी का पूरा संदर्भ राजनीतिक बहस के महत्वपूर्ण पहलू हैं। किसी भी बयान का आकलन करते समय उसके पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर अपनी छवि मजबूत करने और विरोधियों के बयानों का जवाब देने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ वीडियो सॉन्ग के जरिए भाजपा ने अपने समर्थकों के बीच प्रधानमंत्री के नेतृत्व को लेकर दृढ़ता का संदेश देने का प्रयास किया है। पार्टी ने खरगे की टिप्पणी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर हमला तेज किया है और इसे डिजिटल अभियान का रूप दिया है।
इस घटनाक्रम से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली, वरिष्ठ नेताओं के बयान अब केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सोशल मीडिया पर व्यापक बहस पैदा करते हैं। दूसरी, राजनीतिक दल विवादों का जवाब देने के लिए गीत और वीडियो जैसे रचनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। तीसरी, भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब डिजिटल प्रचार के मोर्चे पर भी लगातार तेज हो रही है।
हालांकि, किसी एक वीडियो सॉन्ग या विवाद से मतदाताओं की राय में कितना बदलाव आएगा, इसका आकलन करना अभी संभव नहीं है। इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद भाजपा ने ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ वीडियो सॉन्ग के जरिए जवाबी अभियान तेज कर दिया है। संबित पात्रा, पीयूष गोयल, मोहन यादव, रेखा गुप्ता और अन्नपूर्णा देवी सहित कई भाजपा नेताओं ने वीडियो साझा किया है।
इस विवाद ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस वीडियो और भाजपा के अभियान पर क्या प्रतिक्रिया देती है तथा यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल, खरगे की टिप्पणी और भाजपा के जवाबी गीत ने राष्ट्रीय राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


