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- 12h ago
मथुरा। बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानून के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल, टाउनशिप नगर, मथुरा में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के संबंध में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं को बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों, उनके अधिकारों तथा उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा श्री विकास कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनुराग शर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती अनीता सिंह, पूर्व डीजीसी श्री रनवीर चौधरी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थ श्री निमेष गर्ग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथिगण द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात विद्यालय की ओर से अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय जनपद न्यायाधीश श्री विकास कुमार ने छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के संबंध में सरल और सहज भाषा में महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के यौन अपराध, उत्पीड़न अथवा शोषण से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की असहज, अनुचित अथवा आपत्तिजनक स्थिति का सामना होने पर उसे छिपाने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को यह समझना भी जरूरी है कि किसी अपराध की स्थिति में कानून उनकी सुरक्षा के लिए मौजूद है।
उन्होंने बाल अधिकारों, बाल संरक्षण और बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों से संबंधित विभिन्न विधिक प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही कानून का उल्लंघन करने पर होने वाले विधिक परिणामों के बारे में भी छात्र-छात्राओं को बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी देना भी उतना ही आवश्यक है। जागरूक बच्चे किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचानने और समय रहते उसके बारे में जानकारी देने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।
छात्र-छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी बच्चे के साथ होने वाली घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी बच्चे को किसी प्रकार की समस्या या खतरा महसूस होता है तो वह अपने माता-पिता, शिक्षक या अन्य भरोसेमंद वयस्क से सहायता ले सकता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा पॉक्सो अधिनियम, बाल अधिकार और बाल संरक्षण जैसे विषयों पर तैयार की गई चित्रकलाओं का भी अवलोकन किया गया। माननीय जनपद न्यायाधीश श्री विकास कुमार ने विद्यालय के विभिन्न कक्षों में जाकर बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकलाओं को देखा।
उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता और जागरूकता की सराहना की। चित्रकलाओं के माध्यम से बच्चों ने अपनी समझ और विचारों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। जनपद न्यायाधीश ने बच्चों से संवाद करते हुए उनका व्यक्तिगत रूप से उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।
चित्रकलाओं में बच्चों ने सुरक्षा, जागरूकता, बाल अधिकार और सुरक्षित वातावरण जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को कानून की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें अपनी बात रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका के बारे में भी बताया गया। उन्हें समझाया गया कि जरूरतमंद लोगों को कानून से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा संस्थाएं कार्य करती हैं।
वक्ताओं ने बच्चों और उनके अभिभावकों को यह संदेश दिया कि किसी भी कानूनी समस्या की स्थिति में जानकारी के अभाव में चुप न रहें और उपलब्ध कानूनी सहायता के माध्यमों की जानकारी प्राप्त करें। बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में समय पर सूचना और उचित सहायता महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी संदेश दिया गया कि विद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ उन्हें सामाजिक और कानूनी रूप से जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यालयों में समय-समय पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने से बच्चों को कानून की बुनियादी जानकारी मिलती है और वे अपने अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
विशेष रूप से बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचना जरूरी है। इससे बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों के साथ-साथ डिजिटल और सामाजिक व्यवहार में सावधानी बरतने के संबंध में भी जागरूक किया गया। बच्चों को बताया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा न करें और ऐसी कोई जानकारी या सामग्री साझा न करें, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल हो सकता है।
ऑनलाइन माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बच्चों की डिजिटल सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बनती जा रही है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन चैट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय बच्चों को अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत किसी विश्वसनीय वयस्क को देने के लिए जागरूक किया जाना आवश्यक है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, विद्यालय, समाज और कानून लागू करने वाली संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। बच्चों को यदि उनके अधिकारों और कानूनी संरक्षण की जानकारी होगी तो वे कठिन परिस्थितियों में समय पर सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
वक्ताओं ने बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों को केवल कानूनी विषय न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। कानून से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाए जाने के कारण विद्यार्थियों ने रुचि दिखाई। चित्रकला जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी बच्चों ने बाल सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपनी समझ प्रस्तुत की।
जनपद न्यायाधीश द्वारा बच्चों की चित्रकलाओं का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किए जाने से विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर बच्चों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के साथ-साथ सामाजिक और कानूनी विषयों को समझने के लिए भी प्रेरित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम, 2012, बाल अधिकारों और बाल संरक्षण संबंधी कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना रहा। साथ ही बच्चों को यह जानकारी देना भी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा कि किसी भी प्रकार की समस्या या अपराध की स्थिति में उन्हें कहां और किस प्रकार सहायता प्राप्त हो सकती है।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित वातावरण, अपने अधिकारों की जानकारी और कानून के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। अधिकारियों ने बच्चों को जागरूक रहने तथा किसी भी अनुचित घटना की जानकारी उचित व्यक्ति या संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और अन्य संबंधित लोगों की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में बाल सुरक्षा और विधिक जागरूकता को लेकर दिए गए संदेशों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। इस प्रकार कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, बाल अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


